ओरछा का विश्व प्रसिद्ध श्रीरामराजा मंदिर में दर्शानाथियों के प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध 8 जून को खुल सकता है।

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रिपोर्ट भगत सिंह परिहार ओरछा                                                                                                    ओरछा. पर्यटन नगरी ओरछा का विश्व प्रसिद्ध श्रीरामराजा मंदिर में दर्शानाथियों के प्रवेश पर लगाया गया प्रतिबंध 8 जून को खुल सकता है। कोरोना महामारी के चलते 17 मार्च से रामराजा मंदिर के मुख्यद्वार को श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया था। 75 दिन से बंद रहे मंदिर का जायजा लेने निवाड़ी कलेक्टर ओरछा पहुंचे। जहां उन्होंने मंदिर खोलने को लेकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके अलावा मुख्य चौराहा और मंदिर प्रांगण की स्थिति देखकर निर्देश दिए।

श्रीरामराजा मंदिर में विगत 17 मार्च से काेरोना वायरस के चलते दर्शानार्थियों का प्रवेश प्रशासन द्वारा बंद कर दिया गया था। तब से सरकार के दरबार की व्यवस्थाएं व पूजा प्राचीन परम्परा के अनुसार दिन में चार बार पुलिस के गार्ड ऑफ आनर के साथ पूजा विधि-विधान से चलती रही, लेकिन दर्शानार्थी इस महामारी के चलते अपने सरकार के दर्शनों से वंचित रहे। रविवार की शाम निवाड़ी कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह मंदिर खोले जाने की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अधिकारियों के साथ ओरछा पहुंचे। दर्शनार्थी की सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से मुख्य चौराहे से ही एक-एक मीटर की दूरी पर सफेद कलर के गोले बनाए गए। साथ ही जगह-जगह नल लगाकर साबुन से हाथ धोने की व्यवस्था की गई। जिससे कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है।
तहसीलदार रोहित वर्मा ने बताया कि मंदिर प्रांगण का निरीक्षण किया गया। अब दर्शनाथियों की आस जगी है कि संभवता केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार मंदिर खोलकर प्रतिबंध हटाया जाएगा। जिससे सरकार के दर्शन हो सके।

500 वर्ष के इतिहास में पहली बार हुआ मंदिर बंद
महामारी कोरोना वायरस के चले प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी करते हुए ओरछा के 500 वर्ष के इतिहास में पहली बार विश्वविख्यात श्रीरामराजा मंदिर में 17 मार्च से  दर्शनार्थियों का प्रवेश प्रतिबंध था। पर्यटन नगरी में कोरोना को लेकर सतर्कता बरतते हुए नगर के ऐतिहासिक स्मारक राजा महल ,जहांगीर महल, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर सहित सभी पुरातत्वीय स्मारकों स्टेट पुरातत्व विभाग के आदेश पर  बंद है। तहसीलदार रोहित वर्मा ने बताया कि परम्परा अनुसार सरकार की पूजा-अर्चना होती आ रही है। सुबह बाल भोग आरती, दोपहर राज भोग आरती और रात 8 बजे संध्या व रात 10.30 बजे शयन आरती के बाद सरकार शयन करते है। मंदिर की पूजा में कोई फेर बदल नहीं किया गया है। मंदिर के दोनों द्वार बंद कर केवल दर्शनार्थियों का प्रवेश रोका गया है।

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