सत्ता से स्वयं को दूर क्यो कर लेती है कांग्रेस

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सत्ता से स्वयं को दूर क्यो कर लेती है कांग्रेस

अजय भार्गव

 

सागर/भाजपा जिलाध्यक्ष अर्पित पाण्डेय ने जिस तरह के बोल कांग्रेस के वचन पत्र के एक मुद्दे पर व्यक्त किये है, वह कई अर्थों में इस पुरानी पार्टी के लिए चिंतन का संकेत है। चंद सांसों में फूलने से गुब्बारा आसमान में ऊंचा नहीं उड़ सकता। देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी आखिर आज क्यों तंज़ कसती है एक आम भारतीय की विचारधारा पर। कांग्रेस आरएसएस को देश द्रोही क्यों मानती है। यह समझ से परे है। किसी आम व्यक्ति के लिए आर एस एस से ज्यादा मतलब नहीं है। यह तो चुनाव में कांग्रेस ही लोगों को याद दिलाती है। ऐसा क्यों। पूरे देश के हित का ख्याल और दावा करने वाली कांग्रेस क्यो धर्म विशेष में सिमट जाती है, वह भी तब जब यह वर्ग भी उस पर भरोसा नहीं करता। अट्रोसिटी ने कांग्रेस को मौका दिया था पर कांग्रेस की चुप्पी से यह निकल गया। अब वचन पत्र के फ़िज़ूल वादों ने भाजपा को एक और मौका दे दिया है।

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