जुर्म से थर्राया कोतवाली थाना क्षेत्र, सरिता वर्मन के कार्यकाल में आउट ऑफ कंट्रोल हुए अपराधी

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जुर्म से थर्राया कोतवाली थाना क्षेत्र, सरिता वर्मन के कार्यकाल में आउट ऑफ कंट्रोल हुए अपराधी

एक हफ्ते में तीन फायरिंग, लूट और अन्य वारदातों से दहला इलाका
छतरपुर-ब्यूरोरिपोर्ट
छतरपुर। जिला मुख्यालय का सबसे प्रमुख कोतवाली थाना क्षेत्र इन दिनों आपराधिक घटनाओं से थर्रा उठा है। हर गली में गोलियों की गूंज है। अपराधी बेखौफ होकर लूट जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की सिफारिश पर एसपी तिलक सिंह ने जिस भरोसे के साथ थाना प्रभारी सरिता वर्मन को कोतवाली जैसे अहम थाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। सरिता वर्मन उस भरोसे पर खरा नहीं उतर पायीं। उनके कार्यकाल में न सिर्फ आपराधिक घटनाओं में इजाफा हुआ बल्कि शराब और गांजे के दो मामलों में झूठे मुकदमे लगाने व कोतवाली में भ्रष्टाचार की शिकायतों में बढ़ोत्तरी जैसे मामले भी सामने आने लगे। दो दिन पहले बेखौफ बदमाशों के द्वारा एक दुकानदार से मारपीट के कारण शहर का साम्प्रदायिक माहौल भी बिगडऩे लगा था।

पांच दिन में फायरिंग की तीन घटनाओं से दहले लोग

केस-1- कोतवाली थाना क्षेत्र में पिछले पांच दिन में फायरिंग की तीन घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें से दो घटनाओं की पुष्टि कोतवाली पुलिस कर रही है लेकिन एक घटना को दबा दिया गया। पहली घटना 5 सितम्बर को पठापुर रोड पर भाजपा नेता जुझार सिंह बुन्देला के घर के बगल में घटित हुई थी दोपहर करीब 12 बजे यहां रहने वाले अजय अरजरिया के घर पर बाईक पर आए दो बदमाशों ने कट्टे से फायर किए थे। बदमाशों ने अजय अरजरिया की छत की तरफ भी गोली चलाई थी और मौके से फरार हो गए थे। इस मामले में राजा और कन्हैया नाम के दो बदमाशों के नाम सामने आए थे जिन्होंने अजय अरजरिया के भांजे संजू भूरा से गैंगवार के चलते फायरिंग की घटना को अंजाम दिया था। कोतवाली पुलिस पांच दिन गुजरने के बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

केस-2- इसके बाद फायरिंग की अगली घटना 8 सितम्बर को सामने आई। कोतवाली में एक लिखित आवेदन देते हुए मनीष सोनी, सौरभ सोनी और हैप्पी सोनी निवासी बड़ी कुंजरेहटी ने बताया कि 8 सितम्बर की रात करीब साढ़े 11 बजे जब वे लोग पठापुर रोड के समीप गणेश प्रतिमा के समक्ष चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल थे तभी तेज रफ्तार बाईक से आए संजू भूरा, संचित ठाकुर एवं अन्य युवक ने उन्हें गाली-गलौच करते हुए कट्टे से हवाई फायर किया और दहशत फैलाकर मौके से फरार हो गए। इस मामले में पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। पुलिस का मानना है कि यह संजू भूरा एवं दूसरे गिरोह के बीच चल रहे आपसी गैंगवार का मामला है। हालांकि पुलिस को रोज हो रही फायरिंग को रेाककर ऐसे बदमाशों के खिलाफ कठोर कदम उठाने चाहिए।

केस-3- फायरिंग की तीसरी घटना बीती रात यानि 9 सितम्बर को बस स्टेण्ड के भीड़भाड़ वाले इलाके में सामने आई। बस स्टेण्ड पर मौजूद शासकीय शराब  ठेके के सामने बाईक पर आए बदमाशों ने फायरिंग कर दहशत फैला दी। रात करीब 11.20 बजे तीन बाईक सवारों ने अवैध कट्टों से फायरिंग की और मौके से भाग निकले। फायरिंग की इन घटनाओं से पूरे शहर में दहशत का माहौल है। लोग कांग्रेस सरकार में बढ़ रहे अपराधों पर चिंता जता रहे हैं।

केस-4- दिन दहाड़े बुजुर्ग से लूट के आरोपी 15 दिन बाद भी नहीं मिले

कोतवाली थाना क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक के सामने 26 अगस्त को लूट की एक वारदात सामने आई थी। बैंक से अपनी पेंशन के 50 हजार रूपए लेकर घर जा रहे चौबे कॉलोनी निवासी लक्ष्मीनारायण गुप्ता को बाईक पर आए दो बदमाशों ने धक्का मारकर लूट लिया था। आरोपी इतने बेखौफ थे कि उन्होंने एक 80 साल के बुजुर्ग को दिनदहाड़े धक्का मारा और शहर की प्रमुख सड़क से बैग लेकर फरार हो गए। इस मामले में बुजुर्ग के पैर में गंभीर चोट भी आई थी। कोतवाली पुलिस पहले तो इस मामले को लूट की जगह चोरी में दर्ज करने के प्रयास करती रही लेकिन जब मीडिया में खबरें चलने के बाद सच्चाई सामने आई तो पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन वह भी ठण्डे बस्ते में पड़ा है। कई स्थानों पर सीसीटीव्ही कैमरे लगे होने के बावजूद पुलिस आज तक आरोपियों को पकड़ नहीं सकी है।

*गांजे और शराब के झूठे केस बनाकर पैसे लेने के आरोप*

सिर्फ आपराधिक घटनाएं ही नहीं कोतवाली थाना क्षेत्र में सरिता वर्मन का कार्यकाल अब भ्रष्टाचार के लिए भी कुख्यात हो रहा है। एक स्कूटी पर 6 पेटी शराब पकडऩे जैसा नायाब मामला भी उन्हीं के कार्यकाल में दर्ज हुआ तो वहीं एक गांजे के तस्कर को पकड़कर उसे छोडऩे और उसके बदले दूसरे व्यक्ति को आरोपी बनाने का मामला भी सुर्खियों में रहा। आरोप हैं कि कोतवाली पुलिस ने बड़ी रकम लेकर इन मामलों में हेरफेर किया है।

*एसपी और एएसपी की मेहनत पर फिर रहा पानी*

एसपी तिलक सिंह और एएसपी जयराज कुबेर लगातार शहर में आपराधिक घटनाओं को कम करने और अपराधियों के भीतर पुलिस का खौफ पैदा करने के प्रयास करने में जुटे हैं लेकिन अधीनस्थ अमले में फैले भ्रष्टाचार के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। एसपी ने एक महीने पहले तीनों थाना प्रभारियों की बैठक लेकर बदमाशों को चिन्हित कर गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे इस पर थाना प्रभारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। एएसपी भी खुद बाईक पर शहर की सड़कों की खाक छान रहे हैं। इसके बाद भी थाना प्रभारी अपने अधिकारियों की मेहनत को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

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